कैंसर से जुड़ी हर ज़रूरी जानकारी

कैंसर से जुड़ी हर ज़रूरी जानकारी | Complete Cancer Guide

कैंसर की शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता है, कुछ सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं। ये लक्षण कैंसर के प्रकार और शरीर में स्थान पर निर्भर करते हैं।

सामान्य लक्षण:

  1. असामान्य गाठ या सूजन: शरीर के किसी हिस्से में बिना दर्द के गाठ या सूजन होना।
  2. लगातार थकान और कमजोरी: सामान्य आराम करने के बाद भी थकान महसूस होना।
  3. अनियोजित वजन कम होना: बिना किसी डाइटिंग के अचानक वजन कम होना।
  4. खांसी या सांस लेने में समस्या: लंबे समय तक खांसी, खून आना, या सांस लेने में कठिनाई।
  5. पेट या पाचन की समस्या: अपच, बार-बार उल्टी, कब्ज या दस्त।
  6. त्वचा में बदलाव: रंग बदलना, दाने, सूजन या घाव जो जल्दी ठीक न हो।
  7. खून आना: पेशाब, मल या खाँसी में खून आना।
  8. दर्द: किसी खास जगह लगातार दर्द होना।
  9. भूख में कमी: बिना वजह भूख कम होना।

कैंसर के प्रकार

1.स्तन कैंसर (Breast Cancer)

2.फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer)

  • फेफड़ों का कैंसर वह रोग है जिसमें फेफड़ों की कोशिकाएँ असामान्य और तेजी से बढ़ने लगती हैं। यह धीरे-धीरे गांठ (ट्यूमर) बनाती है और समय पर इलाज न होने पर फेफड़े और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती है।

    लक्षण:

    • लंबे समय तक खांसी रहना या खांसी में खून आना

    • सांस लेने में तकलीफ या धड़कन तेज होना

    • सीने में दर्द या भारीपन

    • आवाज में बदलाव या कर्कशपन

    • बार-बार बुखार या संक्रमण

    • वजन कम होना और थकान महसूस होना

    कारण:

    • धूम्रपान (सिगरेट, बीड़ी, हुक्का)

    • पासिव स्मोकिंग (धुएँ के संपर्क में आना)

    • प्रदूषण और हानिकारक रसायनों का संपर्क

    • परिवार में कैंसर का इतिहास

    जाँच:

    • X-ray, CT स्कैन, बायोप्सी और ब्लड टेस्ट से पहचान होती है।

    उपचार:

    • सर्जरी, कीमोथेरपी, रेडियोथेरपी और कभी-कभी दवाइयाँ

    बचाव:

    • धूम्रपान और प्रदूषण से बचें

    • संतुलित आहार और नियमित व्यायाम करें

    • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं

    निष्कर्ष:
    फेफड़ों का कैंसर समय पर पहचान और इलाज से नियंत्रित किया जा सकता है। किसी भी लगातार खांसी या सांस की परेशानी पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

3.गर्भाशय या सर्विक्स कैंसर (Cervical Cancer)

  • गर्भाशय या सर्विक्स कैंसर महिलाओं में होने वाला एक आम और गंभीर कैंसर है। यह गर्भाशय की गर्दन (सर्विक्स) में होता है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, इसलिए कई बार इसका पता देर से चलता है।

    इसके मुख्य लक्षणों में माहवारी के बीच या संबंध बनाने के बाद खून आना, रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव, पेट या कमर के निचले हिस्से में दर्द, बदबूदार या असामान्य योनि स्राव और कमजोरी शामिल हैं।

    इस कैंसर का सबसे बड़ा कारण एचपीवी (HPV) वायरस का संक्रमण माना जाता है। इसके अलावा कम उम्र में शादी, बार-बार गर्भधारण, धूम्रपान, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता और साफ-सफाई की कमी भी इसके खतरे को बढ़ाती है।

    समय पर पहचान के लिए पैप स्मीयर टेस्ट, एचपीवी टेस्ट और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी की जाती है।

    उपचार में कैंसर की अवस्था के अनुसार सर्जरी, रेडियोथेरपी और कीमोथेरपी की जाती है।

    बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन लगवाना, साफ-सफाई रखना, सुरक्षित संबंध बनाना और नियमित जांच कराना बहुत जरूरी है।

    निष्कर्ष: गर्भाशय कैंसर का समय पर पता लग जाए तो इसका इलाज संभव है, इसलिए महिलाओं को नियमित जांच जरूर करानी चाहिए।

4.पेट का कैंसर (Stomach Cancer)

  • पेट का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसमें पेट की अंदरूनी परत की कोशिकाएँ गलत तरीके से बढ़ने लगती हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते। इसी कारण कई बार इसका पता देर से चलता है।

    इसके लक्षण शुरू में हल्के होते हैं, जैसे बार-बार अपच होना, पेट में जलन, गैस या भारीपन महसूस होना। आगे चलकर पेट में दर्द, भूख कम लगना, बिना कारण वजन कम होना, उल्टी आना या उल्टी में खून, और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

    पेट के कैंसर के कारणों में गलत खान-पान, ज्यादा मसालेदार और तला-भुना खाना, धूम्रपान, शराब पीना, लंबे समय तक पेट का अल्सर, और एच. पाइलोरी बैक्टीरिया का संक्रमण शामिल है।

    जाँच के लिए डॉक्टर एंडोस्कोपी, बायोप्सी, सीटी स्कैन और खून की जाँच करते हैं।

    इलाज में सर्जरी, कीमोथेरपी और रेडियोथेरपी की जाती है। इलाज कैंसर की स्टेज पर निर्भर करता है।

    बचाव के लिए ताजा और संतुलित भोजन करें, धूम्रपान-शराब से बचें, साफ-सफाई रखें और पेट की परेशानी को नजरअंदाज न करें।

    निष्कर्ष: पेट के कैंसर का समय पर पता लगना बहुत जरूरी है। लंबे समय तक पेट की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

5.लीवर कैंसर (Liver Cancer)

  • लीवर कैंसर एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है जिसमें जिगर (Liver) की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि होती है और ये कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। लीवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो भोजन से पोषक तत्वों को संसाधित करने, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और शरीर में ऊर्जा के स्तर को नियंत्रित करने का काम करता है। जब लीवर में कैंसर विकसित होता है तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है।

6. आंत का कैंसर ( Intestinal Cancer)

  • आंत का कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें आंत की अंदरूनी कोशिकाएँ धीरे-धीरे खराब होने लगती हैं और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह कैंसर ज़्यादातर बड़ी आंत में होता है और शुरुआत में इसका पता लगाना मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण साफ नहीं होते।

    इस बीमारी में व्यक्ति को पेट में बार-बार दर्द, गैस बनना, पेट फूलना, कब्ज और दस्त का बार-बार बदलना, मल पतला या काला होना और मल में खून आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा कमजोरी, थकान और वजन कम होना भी इसके संकेत हो सकते हैं।

    आंत के कैंसर के मुख्य कारणों में गलत खान-पान, फाइबर की कमी, ज्यादा तला-भुना और पैकेट वाला खाना, धूम्रपान और शराब, मोटापा, बढ़ती उम्र और परिवार में कैंसर का इतिहास शामिल है।

    डॉक्टर इस कैंसर की पहचान के लिए कोलोनोस्कोपी, खून की जांच, सीटी स्कैन और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी करते हैं।

    इलाज में कैंसर वाली जगह को सर्जरी से निकालना, उसके बाद कीमोथेरपी या रेडियोथेरपी दी जाती है। इलाज बीमारी की स्थिति पर निर्भर करता है।

    बचाव के लिए हरी सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज खाना, पानी ज्यादा पीना, रोज़ चलना-फिरना और नशे से दूर रहना बहुत ज़रूरी है।

    निष्कर्ष: आंत के कैंसर को समय रहते पहचान लिया जाए तो इसका इलाज संभव है, इसलिए पेट या मल से जुड़ी परेशानी को कभी हल्के में न लें।

7.त्वचा का कैंसर (Skin Cancer)

  • त्वचा का कैंसर वह बीमारी है जिसमें त्वचा की कोशिकाएँ असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। यह कैंसर ज़्यादातर उन लोगों में होता है जो लंबे समय तक धूप में रहते हैं। सूरज की तेज़ अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें त्वचा को नुकसान पहुँचाती हैं, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

    इसके लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। त्वचा पर नया तिल बनना, पुराने तिल का आकार या रंग बदलना, कोई घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो, त्वचा पर लाल या काले रंग का धब्बा, खुजली या खून आना—ये सभी संकेत हो सकते हैं।

    त्वचा के कैंसर के कारणों में ज़्यादा धूप में रहना, सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना, गोरी त्वचा, बार-बार सनबर्न होना, बढ़ती उम्र और परिवार में कैंसर का इतिहास शामिल हैं।

    जाँच के लिए डॉक्टर त्वचा की जांच करते हैं और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी कराई जाती है।

    इलाज कैंसर की गंभीरता पर निर्भर करता है। शुरुआत में सर्जरी से कैंसर वाली त्वचा को हटाया जाता है। कुछ मामलों में रेडियोथेरपी या दवाइयों की जरूरत पड़ सकती है।

    बचाव के लिए तेज़ धूप से बचें, बाहर जाते समय सनस्क्रीन लगाएँ, पूरे कपड़े पहनें और त्वचा में किसी भी बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें।

    निष्कर्ष: त्वचा के कैंसर का समय पर पता लग जाए तो यह पूरी तरह ठीक हो सकता है।

     
     

8.रक्त (ब्लड) कैंसर – ल्यूकेमिया (Leukemia)

  • ल्यूकेमिया एक प्रकार का ब्लड कैंसर है। इसमें शरीर की सफेद रक्त कोशिकाएँ (White Blood Cells) जरूरत से ज़्यादा और गलत तरीके से बनने लगती हैं। ये खराब कोशिकाएँ खून में फैल जाती हैं और शरीर की अच्छी कोशिकाओं को काम करने नहीं देतीं। इससे शरीर की ताकत कम हो जाती है और बीमारी से लड़ने की क्षमता घट जाती है।

    ल्यूकेमिया के लक्षण शुरू में हल्के होते हैं, जैसे जल्दी थक जाना, कमजोरी महसूस होना और बार-बार बीमार पड़ना। आगे चलकर बुखार रहना, वजन कम होना, सांस फूलना, त्वचा का पीला पड़ना, नाक या मसूड़ों से खून आना और शरीर पर नीले निशान पड़ना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। कई बार हड्डियों या जोड़ों में दर्द भी होता है।

    ल्यूकेमिया के कारण पूरी तरह साफ नहीं हैं, लेकिन रेडिएशन, कुछ रसायनों के संपर्क में आना, पहले की गई कीमोथेरपी और आनुवंशिक कारण इसकी संभावना बढ़ा सकते हैं।

    जाँच के लिए खून की जांच और बोन मैरो टेस्ट किया जाता है।

    इलाज में कीमोथेरपी, दवाइयाँ और कुछ मामलों में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया जाता है।

    निष्कर्ष: ल्यूकेमिया गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर पता लगने और सही इलाज से इसे काबू में किया जा सकता है। कमजोरी और बार-बार बीमार होने को नजरअंदाज़ न करें।

9. (Brain Cancer)

  • मस्तिष्क का कैंसर वह बीमारी है जिसमें दिमाग की कोशिकाएँ गलत तरीके से बढ़ने लगती हैं और गांठ बना लेती हैं, जिसे ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। यह ट्यूमर दिमाग के काम पर असर डालता है, जैसे सोचने, बोलने, देखने और शरीर को संतुलन में रखने में परेशानी होना।

    इस बीमारी के लक्षण शुरू में हल्के होते हैं। अक्सर सिरदर्द रहना, उल्टी आना, चक्कर आना, नजर कमजोर होना, बोलने में दिक्कत, याददाश्त कमजोर होना और शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस होना इसके सामान्य संकेत हैं। कुछ लोगों को दौरे (मिर्गी) भी पड़ सकते हैं।

    मस्तिष्क के कैंसर के कारण पूरी तरह साफ नहीं हैं, लेकिन ज्यादा रेडिएशन के संपर्क में आना, आनुवंशिक कारण और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता से इसका खतरा बढ़ सकता है।

    इस कैंसर की जाँच के लिए डॉक्टर MRI, CT स्कैन और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी कराते हैं।

    इलाज कैंसर की गंभीरता पर निर्भर करता है। इसमें सर्जरी, रेडियोथेरपी और कीमोथेरपी शामिल हो सकती है।

    बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, मोबाइल और रेडिएशन के अधिक उपयोग से बचना और समय पर जांच कराना जरूरी है।

    निष्कर्ष: मस्तिष्क कैंसर का समय पर पता लग जाए तो इलाज संभव है। लगातार सिरदर्द या दौरे आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

10.प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer)

प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक आम कैंसर है। प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि होती है, जो मूत्राशय के नीचे होती है और वीर्य बनाने में मदद करती है। जब प्रोस्टेट की कोशिकाएँ गलत तरीके से बढ़ने लगती हैं, तो प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है। यह कैंसर ज़्यादातर 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में पाया जाता है।

इसके लक्षण शुरुआत में कम दिखाई देते हैं। धीरे-धीरे पेशाब करने में दिक्कत, बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में, पेशाब की धार कमजोर होना, पेशाब करते समय जलन या दर्द और कभी-कभी पेशाब या वीर्य में खून आना इसके संकेत हो सकते हैं।

प्रोस्टेट कैंसर के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन बढ़ती उम्र, परिवार में कैंसर का इतिहास, मोटापा और गलत जीवनशैली से इसका खतरा बढ़ सकता है।

जाँच के लिए डॉक्टर PSA टेस्ट, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी कराते हैं।

इलाज कैंसर की स्टेज पर निर्भर करता है। शुरुआत में दवाइयाँ और निगरानी, जबकि गंभीर स्थिति में सर्जरी, रेडियोथेरपी या हार्मोन थेरपी दी जाती है।

बचाव के लिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और समय-समय पर जांच जरूरी है।

निष्कर्ष: प्रोस्टेट कैंसर का समय पर पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। पेशाब से जुड़ी समस्या को कभी नजरअंदाज़ न करें।

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की कोशिकाएँ असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। यह बीमारी शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है, जैसे फेफड़े, पेट, स्तन, त्वचा, लीवर, मस्तिष्क आदि। कैंसर का मुख्य कारण कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव (म्यूटेशन) होता है, जिससे उनका सामान्य विभाजन और वृद्धि असामान्य हो जाता है।

कैंसर की गंभीरता कई कारणों से बढ़ जाती है। सबसे पहला कारण यह है कि इसकी पहचान प्रारंभिक चरण में कठिन होती है। अक्सर शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जैसे थकान, वजन घटना, हल्का दर्द या पेट में असामान्य अनुभव। जैसे-जैसे समय बीतता है, यह बीमारी अन्य अंगों में फैल सकती है (मेटास्टेसिस), जिससे उपचार और भी मुश्किल हो जाता है।

कैंसर के कारणों में अनुवांशिकता, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, अस्वस्थ जीवनशैली, प्रदूषण, और हानिकारक रसायनों का संपर्क शामिल हैं। इसके अलावा, सूरज की हानिकारक किरणें और कुछ वायरल संक्रमण भी कैंसर का कारण बन सकते हैं।

कैंसर के लक्षण उसके प्रकार और स्थिति पर निर्भर करते हैं। कुछ सामान्य लक्षण हैं: शरीर में गाठ या सूजन, लगातार थकान, वजन घटना, दर्द, असामान्य रक्तस्राव, पाचन समस्याएँ और त्वचा या मुँह में बदलाव। समय पर जांच और सही निदान बहुत जरूरी है, क्योंकि शुरुआती चरण में उपचार अधिक सफल होता है।

कैंसर का उपचार सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन और इम्यूनोथेरेपी के माध्यम से किया जाता है। हालांकि यह बीमारी गंभीर है, लेकिन सकारात्मक सोच, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर चिकित्सा उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से बचाव, और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कैंसर से बचाव में मदद करते हैं।

सारांश में, कैंसर वास्तव में एक गंभीर बीमारी है, लेकिन जागरूकता, सावधानी और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से इसे समय पर रोका और नियंत्रित किया जा सकता है। हर व्यक्ति को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कैंसर के मरीज की देखभाल में सहानुभूति और धैर्य सबसे महत्वपूर्ण है। उन्हें मानसिक समर्थन दें और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। उनकी दवाई और उपचार समय पर लेने में मदद करें। संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पिलाएं। व्यायाम और आराम का संतुलन बनाए रखें। दर्द या असुविधा होने पर डॉक्टर को तुरंत सूचित करें। संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें। मरीज की भावनाओं को समझें और उन्हें तनाव-मुक्त रखने की कोशिश करें। समय-समय पर डॉक्टर की सलाह और जांच करवाना भी जरूरी है।

कैंसर: एक गंभीर रोग

कैंसर एक गंभीर रोग है लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर रोगी अपनी शारीरिक और मानसिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं। सबसे पहले, संतुलित और पौष्टिक आहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हरी सब्जियाँ, फल,  अनाज, दालें और प्रोटीन युक्त भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। तले-भुने, अत्यधिक मीठे तथा जंक फूड से बचना चाहिए। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी आवश्यक है।

1.फल और सब्जियां

  • ताजे फल और सब्जियां, खासकर हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं।

2.अनाज और साबुत अनाज

  • ब्राउन राइस, ओट्स, जौ और बाजरा जैसे साबुत अनाज ऊर्जा देते हैं और पाचन के लिए अच्छे हैं।

3.प्रोटीन युक्त आहार

  • अंडा, दाल, सोया, मछली, चिकन और दही जैसी चीजें मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं।

क्या महिला और पुरुष में कैंसर एक जैसा होता है?

कैंसर पुरुष और महिला दोनों में हो सकता है, लेकिन इसका प्रकार और प्रभावित अंग अलग हो सकते हैं। महिलाओं में स्तन कैंसर, गर्भाशय (सर्विक्स) कैंसर आम हैं, जबकि पुरुषों में प्रोस्टेट और फेफड़ों का कैंसर ज्यादा होता है। दोनों में फेफड़े, पेट, लीवर और त्वचा के कैंसर हो सकते हैं। लक्षण, कारण और इलाज भी समान होते हैं, जैसे गाठ, वजन कम होना, थकान, सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन। इसलिए पुरुष और महिला दोनों में कैंसर हो सकता है, लेकिन शरीर के अंग और जोखिम अलग-अलग हो सकते हैं।

कैंसर और मानसिक स्वास्थ्य

कैंसर केवल शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालती है। कैंसर का पता चलने पर मरीज में चिंता, डर, अवसाद और तनाव जैसी समस्याएँ आम हैं। इलाज के दौरान थकान, दर्द और अनिश्चितता मानसिक स्थिति को और प्रभावित कर सकती है।

कैंसर से जुड़ी हर ज़रूरी जानकारी  कैंसर मरीजों के लिए भावनात्मक और मानसिक समर्थन बहुत जरूरी है। परिवार और दोस्तों का सहयोग, सकारात्मक सोच और संवाद मरीज की मानसिक स्थिति को मजबूत बनाते हैं। कई मरीजों को सपोर्ट ग्रुप या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेने से आराम मिलता है।

सकारात्मक मानसिक स्थिति शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करती है। ध्यान, योग और हल्का व्यायाम तनाव कम करने में सहायक होते हैं। मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने से मरीज न केवल बेहतर महसूस करता है बल्कि इलाज के दौरान भी अधिक स्थिर और मजबूत रहता है।

भारत में कैंसर के मामले

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निष्कर्ष

कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसे बचाव के उपाय अपनाकर रोका जा सकता है। तंबाकू और शराब से दूर रहें, संतुलित आहार लें, रोज़ व्यायाम करें और साफ-सफाई का ध्यान रखें। समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएँ और तनाव कम करें। सही आदतें अपनाकर हम खुद और अपने परिवार को कैंसर जैसी बीमारी से सुरक्षित रख सकते हैं।

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